Friday, 6 January 2023

राजा बलि पिछले जन्म में कौन था? - एससीपी फ़ाउंडेशन एनजीओ मधुबनी बिहार

 राजा बलि पिछले जन्म में कौन था?




राजा बलि के पूर्वज प्रह्लाद थे। जो कि भगवान विष्णु के अनन्य भक्त थे। पुराणों में वर्णित हिंदू कथाओं को मानें तो राजा बलि पूर्वजन्म में जुआरी थे।


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राजा बलि - एससीपी फ़ाउंडेशन एनजीओ मधुबनी बिहार

 राजा बलि

महाबली संविभागी बळीराजा
वामन और बलि
बलि सप्तचिरजीवियों में से एक, पुराणप्रसिद्ध विष्णुभक्त, दानवीर, महान् योद्धा थे। विरोचनपुत्र असुरराज बलि सभी युद्ध कौशल में निपुण थे। वे वैरोचन नामक साम्राज्य के सम्राट थे जिसकी राजधानी महाबलिपुर थी। इन्हें परास्त करने के लिए विष्णु का वामनावतार हुआ था। इसने असुरगुरु शुक्राचार्य की प्रेरणा से देवों को विजित कर स्वर्ग लोक पर अधिकार कर लिया । समुद्रमंथन से प्राप्त रत्नों के लिए जब देवासुर संग्राम छिड़ा और असुरों एवं देवताओं के बीच युद्ध हुआ तो असुरों ने अपनी मायावी शक्तियों एवं का प्रयोग कर के देवताओं को युद्ध में परास्त किया। उस के बाद राजा बलि ने विश्वजित्‌ और शत अश्वमेध यज्ञों का संपादन कर तीनों लोकों पर अधिकार जमा लिया।





कालांतर में जब यह अंतिम अश्वमेघ यज्ञ का समापन कर रहा था, तब दान के लिए वामन रूप में ब्राह्मण वेशधारी विष्णु उपस्थित हुए। शुक्राचार्य के सावधान करने पर भी बलि दान से विमुख न हुआ। वामन ने तीन पग भूमि दान में माँगी और संकल्प पूरा होते ही विशाल रूप धारण कर प्रथम दो पगों में पृथ्वी और स्वर्ग को नाप लिया। शेष दान के लिए बलि ने अपना मस्तक नपवा दिया। लोक मान्यता है कि पार्वती द्वारा शिव पर उछाले गए सात चावल सात रंग की बालू बनकर कन्याकुमारी के पास बिखर गए। 'ओणम' के अवसर पर राजा बलि केरल में प्रतिवर्ष अपनी प्यारी प्रजा को देखने आते हैं। राजा बलि का टीला मथुरा में है।

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मधुबनी बिहार

राजा बलि कौन से कास्ट के थे?

 राजा बलि कौन से कास्ट के थे?

पुराकाल में “बलि” (Raja Bali) नाम से एक महापराक्रमी राजा थे । उनका जन्म असुर-वंश में हुआ था और ये असुरों के ही राजा थे तथा वे बड़े न्याय-निष्ठ और दानी थे । ये महाराज प्रह्वाद के पौत्र और विरोचन के पुत्र थे।



देश-दुनिया की नजरों से ओझल हैं राजा बलि का गढ़- “बलिराजगढ़”

 देश-दुनिया की नजरों से ओझल हैं राजा बलि का गढ़- “बलिराजगढ़”


मधुबनी जिले के बाबूबरही प्रखंड क्षेत्र स्थित 122.31 एकड़ में फैले पुरातात्विक महत्व के स्थल बलिराजगढ़ की पूर्व में तीन बार हो चुकी खुदाई में कई ऐतिहासिक प्रमाण मिल चुके हैं। पूर्व में दो बार भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण और एक बार राज्य पुरातत्व विभाग द्वारा उक्त स्थल की खुदाई की जा चुकी है। यहां पूर्ण खुदाई अबतक नहीं हो पाई है, जिस कारण कई महत्वपूर्ण ऐतिहासिक तथ्य अभी देश-दुनिया की नजरों से ओझल हैं। राजा बलि का गढ़ के रूप में स्थल की प्रसिद्धि है।


मधुबनी जिले के बाबूबरही प्रखंड अंतर्गत बलिराजगढ़ में प्राचीन किला तथा गढ़ होने के प्रमाण मिल चुके हैं। इसे राजा बलि का गढ़ होना बताया जाता है। यह स्थल भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा संरक्षित स्थल है। तीन बार इस जगह की खुदाई ओर सर्वेक्षण किया जा चुका है।

भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआइ) ने पहली बार वर्ष 1962-63 में यहां खुदाई की थी। जिसके बाद राज्य पुरातत्व, बिहार सरकार ने 1972-73 में खुदाई की। इसके बाद भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआइ) ने वर्ष 2013-14 में खुदाई का कार्य किया। खुदाई में पांच चरणों के सांस्कृतिक कालों यथा-उत्तरी काले मृदमाण्ड, शुंग, कुषाण, गुप्त व इसके बाद पाल के काल के पुरावशेषों का पता चला।

खोज में तीन विभिन्न चरणों में परकोटा के अवशेष, जली हुई ईंटों की संरचना के अवशेष और आवासीय भवनों की अन्य संरचनाएं भी प्रकाश में आईं हैं। पुरावशेषों में टेराकोटा की वस्तुएं जैसे जानवर और मनुष्य की मूर्तियां आदि शामिल हैं।

17 जनवरी 2012 को सेवा यात्रा के क्रम में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार यहां पहुंचे थे। इस दौरान सीएम ने पुरातावकि महत्व वाले बलिराजगढ़ की पूर्ण खुदाई का आश्वासन दिया था। सीएम नीतीश कुमार ने दिया हुआ है इस बलीराजबढ किले के पूर्ण खुदाई एवं पर्यटक क्षेत्र के रुओ में विकसित करने का आश्वासन।



बलिराजगढ़ को पर्यटक क्षेत्र के रूप में विकसित करने को लेकर दो वर्ष पूर्व तत्कालीन डीएम शीर्षत कपिल अशोक ने इसकी खुदाई कराने तथा इसे पर्यटक स्थल के रुप में घोषित करने के लिए राज्य के कला संस्कृति एवं युवा विभाग के प्रधान सचिव को पत्र भेजा था। कला संस्कृति एवं युवा विभाग के प्रधान सचिव के साथ पर्यटन विभाग के प्रधान सचिव एवं अधीक्षक, पुरातत्वविद, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण, अंचल बिहार को भेजे गए अनुरोध पत्र में डीएम ने बलिराजगढ़ की पुरातावकि खुदाई के शुरू कराने के साथ ही स्थल की सुरक्षात्मक व्यवस्था सुनिश्चित करने का जिक्र भी किया था।



सेंट्रली प्रोटेक्टेड साइट बलिराजगढ़ की उचित देख-रेख एवं रख-रखाव नहींं होने से इसकी क्षति हो रही है। चहारदीवारी से घिरा नहीं रहने के कारण असमाजिक तत्वों द्वारा ईंट, पत्थर आदि की चोरी की जा रही है।

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बिहार के राजा बलि गड़ का रहस्य जो मधुबनी जिला के अंदर स्थित है? - scp foundation madhubani

 बिहार के राजा बलि गड़ का रहस्य जो मधुबनी जिला के अंदर स्थित है?






प्राचीन काल में सूर और असुरों का ही राज्य था। सूर को देवता और असुरों को दैत्य कहा जाता था । दानवों और राक्षसों की प्रजाति अलग होती थी ।गंधर्व यक्ष और किन्नर भी होते थे ।

असुरों के पुरोहित शुक्राचार्य भगवान शिव के भक्त और सुरों के पुरोहित बृहस्पति भगवान विष्णु के भक्त थे।

इससे पहले भृगु और अंगिरा ऋषि असुर और देव के पुरोहित पद पर थे । सुर और असुर ओं में साम्राज्य शक्ति प्रतिष्ठा और सम्मान की लड़ाई चलती रहती थी ।

दुनिया में दो ही तरह के धर्मों में प्राचीन काल से झगड़ा होता आया है। एक वह लोग जो देवताओं के गुरु बृहस्पति के धर्म को मानते हैं । और दूसरे वे लोग जो दैत्यों असुरों के गुरु शुक्राचार्य के धर्म को मानते आए हैं।


राजा बलि के पूर्व जन्म की कथा:-

पौराणिक कथाओं के अनुसार राजा बलि अपने पूर्व जन्म में एक जुआरी थे ।एक जुए में उन्हें कुछ धन मिला। उस धन से उन्होंने अपनी प्रिय वेश्या के लिए एक हार खरीदा। बहुत खुशी-खुशी यह हार लेकर वैश्या के घर जाने लगा लेकिन रास्ते में ही इनको मृत्यु ने घेर लिया यह मरने ही वाला था ।

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बलिराजगढ़- एक प्राचीन मिथिला नगरी

 बलिराजगढ़- एक प्राचीन मिथिला नगरी

प्राचीन मिथिलांचल के लगभग मध्यभाग में मधुबनी जिला से 30 किलोमीटर की दुरी पर बाबूबरही थाना के अन्तर्गत आता है। यहां पहुंचने के लिए रेल और सड़क मार्ग दोनों की सुविधा उपलब्ध है। बलिराजगढ़ कामलाबलान नदी से 7 किलोमीटर पूर्व और कोसी नदी से 35 किलोमीटर पश्चिम में मिथिलांचल के भूभाग पर अवस्थित है।
लोकेशन -
पूरब - फुलवारिया
पश्चिम - रमणिपट्टी (बगौल)
उत्तर - ब्भंटोली
दक्षिण - खोईएर

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Thursday, 5 January 2023

CSR Funds for Agriculture, Funds for Farming, Fund for NGOs, CSR Funds | SCP FOUNDATION NEW DELHI

 CSR Funds for Agriculture, Funds for Farming, Fund for NGOs, CSR Funds | SCP FOUNDATION

Top 20 Companies with CSR activies in Agriculture in India

India's agriculture sector plays a pivotal role in the country's economic progress. The increased food demand in local and global markets has opend up enormous opportunities for farmers yet they continue to face challenges such as small and declining land holdings, price instability, soil degradation, and climate risks. Various service providers, such as private aribusiness firms and non-organisations(NGO), must be involded in the transmission of agricultural technologies with informatin, skills, and expertise, while also leveraging Corporate Social Responsibility (CSR) funds.


Despite the fact that companies have spent CSR funds in the agriculture industry, there still lies a significatn opportunity for investment in the social sector. Companies can create CSR projects to help farmers enhance their crops and ern more income. Such Investments witll aid the agriculture  sector's growth and development.






Below are some of the Agricultural projects in India based on the CSR funds allocatioin of each company in the Financial year 2023-2024.


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