बिहार के राजा बलि गड़ का रहस्य जो मधुबनी जिला के अंदर स्थित है?
प्राचीन काल में सूर और असुरों का ही राज्य था। सूर को देवता और असुरों को दैत्य कहा जाता था । दानवों और राक्षसों की प्रजाति अलग होती थी ।गंधर्व यक्ष और किन्नर भी होते थे ।
असुरों के पुरोहित शुक्राचार्य भगवान शिव के भक्त और सुरों के पुरोहित बृहस्पति भगवान विष्णु के भक्त थे।
इससे पहले भृगु और अंगिरा ऋषि असुर और देव के पुरोहित पद पर थे । सुर और असुर ओं में साम्राज्य शक्ति प्रतिष्ठा और सम्मान की लड़ाई चलती रहती थी ।
दुनिया में दो ही तरह के धर्मों में प्राचीन काल से झगड़ा होता आया है। एक वह लोग जो देवताओं के गुरु बृहस्पति के धर्म को मानते हैं । और दूसरे वे लोग जो दैत्यों असुरों के गुरु शुक्राचार्य के धर्म को मानते आए हैं।
राजा बलि के पूर्व जन्म की कथा:-
पौराणिक कथाओं के अनुसार राजा बलि अपने पूर्व जन्म में एक जुआरी थे ।एक जुए में उन्हें कुछ धन मिला। उस धन से उन्होंने अपनी प्रिय वेश्या के लिए एक हार खरीदा। बहुत खुशी-खुशी यह हार लेकर वैश्या के घर जाने लगा लेकिन रास्ते में ही इनको मृत्यु ने घेर लिया यह मरने ही वाला था ।
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